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Latest #sayri Posts

  • #कभी_कभी सोचतीं हूँ जब तन्हा होकर भी 
तन्हा नहीं होती..
मेरे इर्द_गिर्द जब 
रक्स करती हैं बिन बुलाये मेहमान सी 
यादें तेरी.!
तब उस वक्त सबसे छुपकर 
तुझको भर लेती हूँ कसमसाती सी बाहों में मेरी !
और तपते अधरों से तेरे 
मैं पी लेती हूँ प्यास तेरी !
जेसे तपते सेहरा पर अब्र के 
कुछ टुकड़े
तोड़ कर रख दिये हों !
सुलगते जिस्म जल उठते हैं वक़्त की अंगीठी से उठता है 
हवन सा धुआँ.!
दो आत्माओं की
आहुति चढ़ती है ,
प्रेम के हवन कुंड में !
लोबान की गंध से
सुगंधित हो 
प्रकृति मुस्कुराती है !
रात के खामोश संगीत पर 
आकाशगंगा में
एक हलचल सी उठती है.. मानो सारे ग्रह, नक्षत्रों मैं खलबली सी मच गई है! उतर जमीं पर देखते हैं अब भी प्रेम बाकी है 
लोग जीते हैं प्रेम में! मरते हैं पल_पल
कुछ एक पल 
जीने की खातिर!
उफ्फ!
 लोबान की पवित्र सुगंध में
खोकर कुछ देर, 
आता है जब होश उन्हे! भूल जाते हैं वो दूरी, धरती और अंबर की!
सुनो! तुम्हारा और हमारा
मिलन भी 
कुछ ऐसा ही होगा! है ना..!!! तुम्हारी यादें भी ना तुमसी ही 
पागल है, जरा सा मौका मिला नहीं कि 
आ धमकती हैं.!
देखों ये हवाएँ भी चुगल खोर हैं. वक़्त की हर साज़िश की है 
खबर इन्हे,
और ये खबर इन्हे लगने से पहले 
तुम लौट जाओ.!
_राधा श्रोत्रिय "आशा"
All right reserved
#poetry  #poemsporn #nature #lovelove #lovepoetry #relationships #togetherness #igpoet #lovesufism #socialmedia #literaturelove  #soulfulpoetry #feelings #emotions #writer # #mirakee #rekhta  #literaturelove #spritual #tbf #sprituallife #urdupoetry #sayri  #hindiwriter #poetess #radhashrotriyaasha
  • #कभी_कभी सोचतीं हूँ जब तन्हा होकर भी
    तन्हा नहीं होती..
    मेरे इर्द_गिर्द जब
    रक्स करती हैं बिन बुलाये मेहमान सी
    यादें तेरी.!
    तब उस वक्त सबसे छुपकर
    तुझको भर लेती हूँ कसमसाती सी बाहों में मेरी !
    और तपते अधरों से तेरे
    मैं पी लेती हूँ प्यास तेरी !
    जेसे तपते सेहरा पर अब्र के
    कुछ टुकड़े
    तोड़ कर रख दिये हों !
    सुलगते जिस्म जल उठते हैं वक़्त की अंगीठी से उठता है
    हवन सा धुआँ.!
    दो आत्माओं की
    आहुति चढ़ती है ,
    प्रेम के हवन कुंड में !
    लोबान की गंध से
    सुगंधित हो
    प्रकृति मुस्कुराती है !
    रात के खामोश संगीत पर
    आकाशगंगा में
    एक हलचल सी उठती है.. मानो सारे ग्रह, नक्षत्रों मैं खलबली सी मच गई है! उतर जमीं पर देखते हैं अब भी प्रेम बाकी है
    लोग जीते हैं प्रेम में! मरते हैं पल_पल
    कुछ एक पल
    जीने की खातिर!
    उफ्फ!
    लोबान की पवित्र सुगंध में
    खोकर कुछ देर,
    आता है जब होश उन्हे! भूल जाते हैं वो दूरी, धरती और अंबर की!
    सुनो! तुम्हारा और हमारा
    मिलन भी
    कुछ ऐसा ही होगा! है ना..!!! तुम्हारी यादें भी ना तुमसी ही
    पागल है, जरा सा मौका मिला नहीं कि
    आ धमकती हैं.!
    देखों ये हवाएँ भी चुगल खोर हैं. वक़्त की हर साज़िश की है
    खबर इन्हे,
    और ये खबर इन्हे लगने से पहले
    तुम लौट जाओ.!
    _राधा श्रोत्रिय "आशा"
    All right reserved
    #poetry #poemsporn #nature #lovelove #lovepoetry #relationships #togetherness #igpoet #lovesufism #socialmedia #literaturelove #soulfulpoetry #feelings #emotions #writer # #mirakee #rekhta #literaturelove #spritual #tbf #sprituallife #urdupoetry #sayri #hindiwriter #poetess #radhashrotriyaasha
  •  24  6  27 September, 2018